फूलों का आदर्श* *फूल हमें खिलना, मनमोहकता और प्रसन्न रहने को प्रोत्साहित करते हैं. जब तक जान है तबतक प्रसन्न, दिलखुलास रहेना हमारा लक्ष्य होना चाहिए.*

 *फूलों का आ


दर्श*


*फूल हमें खिलना,  मनमोहकता और प्रसन्न रहने को प्रोत्साहित करते हैं. जब तक जान है तबतक प्रसन्न, दिलखुलास रहेना हमारा लक्ष्य होना चाहिए.*




 इसलिए अच्छे लोगों में बैठो, जो बुरे लगते हैं उनमें सुधार के लिए एक कदम आगे बढाओ, अच्छे विचारों का सम्मान करो और अपने भीतर जो बुराई नज़र आती है उसे हर रोज़ निकालने का प्रयास करो. 


*फूल कांटों में रहते हैं लेकिन वो खिलते हैं, मनमोह लेते हैं, सुंदर खुश्बू फैलाते हैं और ईश्वर की कृपा का गुणगान करते हुए हवाओं में लहराते हैं. वक्त की तय सीमा तक  अपने आपको उपयोगी बनाए रखते हैं.*


तो सोंचिए हम फुलों की तरह जीवन में प्रसन्नता  बिखेरने के लिए तयार हैं.


*काँटों में रहकर भी जो हर पल मुस्कुराया है,*

*वो फूल ही नहीं, इंसानियत का साया है।*


सुरह रहमान में अल्लाह तआला फरमाता है,  *और धरती को उसने मख़लूक़ (बंदों) के लिए बिछाया,

उसमें फल हैं और खोल वाले खजूर के दरख़्त,

और भूसी वाले अनाज और खुशबूदार पौधे।* (५५: १०-१२)


- बशीर शेख "कलमवाला"

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