हिंदी दिवस : राष्ट्रभाषा का गौरव और आज की चुनौतियाँ —————— डॉ प्रा खलील सिद्दीकी (लातूर)

 हिंदी दिवस : राष्ट्रभाषा का गौरव और आज की चुनौतियाँ

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डॉ प्रा खलील सिद्दीकी (लातूर) 





भारत विविध भाषाओं और बोलियों का देश है। यहाँ सैकड़ों भाषाएँ बोली जाती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना साहित्य, इतिहास और गौरव है। लेकिन पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधने के लिए एक साझा भाषा की आवश्यकता थी। यही कारण है कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित किया। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

हिंदी दिवस का इतिहास और पृष्ठभूमि:

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह प्रश्न गहन चर्चा का विषय था कि भारत की राजभाषा कौन होगी। अंग्रेज़ी का प्रभाव व्यापक था, किंतु जनता से उसका सीधा संबंध कम था। भारत की अधिकांश जनसंख्या हिंदी भाषा समझती और बोलती थी। लंबे विचार-विमर्श और गहन बहस के बाद देवनागरी लिपि में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया।

संविधान के अनुच्छेद 343 में स्पष्ट प्रावधान किया गया कि “संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।” साथ ही यह भी तय किया गया कि अगले 15 वर्षों तक अंग्रेज़ी का प्रयोग सहायक राजभाषा के रूप में जारी रहेगा। 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई।

हिंदी का महत्व

हिंदी केवल भारत की नहीं, बल्कि विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। नेपाल, फिजी, मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी हिंदी बोली और समझी जाती है।

हिंदी साहित्य की धरोहर में कबीर, तुलसीदास, सूरदास, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर जैसे महापुरुषों की कृतियाँ शामिल हैं।


हिंदी की सरलता और सहजता ही इसे जनमानस की भाषा बनाती है।


यह केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की आत्मा है।

वर्तमान समय की चुनौतियाँ

आज वैश्वीकरण और तकनीकी युग में अंग्रेज़ी का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है। शिक्षा, प्रशासन और व्यापार में अंग्रेज़ी का प्रयोग सामान्य हो गया है। ऐसे में हिंदी के प्रयोग और सम्मान को बढ़ाना समय की मांग है।

विद्यालयों और महाविद्यालयों में हिंदी का व्यवस्थित प्रयोग आवश्यक है।




प्रशासनिक कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हिंदी सामग्री का निर्माण और प्रसार होना चाहिए।

युवाओं में हिंदी लेखन और पठन-पाठन की रुचि बढ़ाना आवश्यक है।

हिंदी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यदि हम हिंदी का प्रयोग गर्व और सम्मान के साथ करेंगे, तो यह न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त करेगी।

इस अवसर पर हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हिंदी का प्रचार-प्रसार करेंगे, इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाएँगे और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी समृद्ध धरोहर पहुँचाएँगे। यही हिंदी दिवस का सच्चा उद्देश्य है।.

फूलों की खुशबू, नदियों का संगीत,

हिंदी है अपने देश का गौरवमयी गीत।

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