12 फरवरी यौमे वफात काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी #नवाब_सैय्यद_मोहम्मद

 12 फरवरी यौमे वफात

काँग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी

#नवाब_सैय्यद_मोहम्मद*

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  📗 *सन् 1913 में #ऑल_इण्डिया_कांग्रेस_कमेटी_के अध्यक्ष बनाये गये*

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🟣नवाब सैय्यद मोहम्मद साउथ इण्डिया के सबसे अमीर

मुसलमानों में से एक और मीर हुमायूं बहादुर के बेटे थे।


🟢हुमायूं बहादुर नेशलिस्ट सोच के मुसलमान थे, जिन्होंने

अपनी शुरुआती सियासी दिनों में कांग्रेस को मज़़बूत करने के लिए ज़हनी और माली ताऊन दिया।


🟡सन् 1887 में *भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीसरे इजलास में हुमायू बहादुर ने कांग्रेस के तंजीमी कामों के तौर पर मदद दी थी।* 



🔵उनकी वालिदा का ताल्लुक टीपूसुल्तान रहमतूल्लाह अलयही के ख़ानदान से था। *वे टीपू सुल्तान के चौथे बेटे सुल्तान यासीन की बेटी शहज़ादी शाहरुख बेगम के पोते थे।* 


🔴सैय्यद मोहम्मद साहब का सियासी सफर दिल्ली और मद्रास के बीच ही रहा जब तक मुस्लिम लीग का कयाम नहीं हुआ था


🟢आपके ख्यालात दुनियावी और टेक्निकल दोनों तरह की तालीम को हिन्दुस्तान के

लोगों देने के कायल थे। इसके लिए आपने भरपूर कोशिश की और कामयाब भी हुए।


🟣आप सन् 1894 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और संगठन के सक्रिय सदस्य बने। 


🟡अपकी सभी तकरीरों में इस बात पर ज़्यादा जोर दिया जाता कि *मुसलमानों और हिन्दुओं को आपस में भाइयों की तरह जीना चाहिए और उनके अलग-अलग मज़हब उन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं करते, बल्कि उन्हें एक-साथ जोड़कर रखते हैं।* 


🟤कांग्रेस के आंदोलनों में भी आप सक्रिय रहे। आपका मानना था कि *भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मकुसद मज़बूत मुल्क के लिए भारत के लोगों को एकजुट करने का है।* 


🟤गोपालकृष्ण गोखले के साथ आपको भी राजनीति में एक

सेकुलर नेता के तौर पर माना जाता था। आप हिंसा के जरिये मूवमेंट के कायल नहीं थे और गांधीजी के रास्ते मुल्क की आज़ादी चाहते थे। 


🟢आप दक्षिण अफ्रीका में

भारतीयों से नस्लीय भेदभाव से दुःखी थे। आपने पहली जंगे अज़ीम के दौरान ब्रिटिश हुकूमत की तुर्की के ख़िलाफ़ की

गयी कार्यवाही की सख़्त मज़ाहमत की और हिन्दुस्तानी मुसलमानों से एकजुट होकर

तुर्की की मदद की अपील की। आप अवाम की समाजी तरक्की के पैरोकार और मददगार थे। 



🟣सन् 1903 में आप मद्रास महाजन सभा के सदर बनाये गये। 


🟢सन् 1913 में ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनाये गये। इससे पहले सन् 1896 में आप मद्रास के पहले मुस्लिम शेरिफ बनाये गये थे। 


🔵सन् 1900 में आप मद्रास विधान परिषद् और सन् 1905 में इम्पिरियल विधान परिषद् के मेम्बर बनाये गये। 


⚫आपका इंतकाल 12 फरवरी, सन् 1919 को हुआ।

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संदर्भ : 1)THE IMMORTALS

SYED NASEER AHAMED


2)*लहू बोलता भी है*

पृष्ठ क्रमांक 217,218

लेखक- *सय्यद शहनवाज अहमद कादरी,कृष्ण कल्की*

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अनुवादक तथा संकलक लेखक - *अताउल्ला पठाण सर टूनकी बुलढाणा महाराष्ट्र*

9423338726





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