28 ऑक्टोबर - यौमे वफात
स्वतंत्रता सेनानी अन्सार हरवानी➡️
*आजादी आंदोलन मे पांच साल से ज्यादा जेल की तकलीफ बरदाशत की।*
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले युवा स्वतंत्रता सेनानी अंसार हरवानीजी का जन्म 16 फरवरी 1916 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रदौली गांव में एक शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सिराजुल हक था। अपने छात्र जीवन से ही अंसार हरवानी अपनी स्वतंत्र सोच के लिए जाने जाते थे। उन्होंने बी.ए. किया और फिर कानून की डिग्री ली। उनकी शिक्षा लखनऊ और अलीगढ़ में हुई जहां उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आह्वान के जवाब में अपने साथी छात्रों के साथ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध गतिविधियों में उनके नेतृत्व से ब्रिटिश अधिकारी क्रोधित हो गये। उन्होंने अलीगढ़ के छात्रों को एकजुट किया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन की स्थापना की और 1936 से 1939 तक इसके महासचिव के रूप में कार्य किया। ब्रिटिश अधिकारियों की चेतावनियों का न तो उनकी कार्यशैली पर कोई प्रभाव पड़ा और न ही उनकी ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के आयोजन में कोई बदलाव आया। उनकी अवज्ञा को सहन करने में असमर्थ ब्रिटिश सरकार ने उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया, और उन्हें किसी अन्य विश्वविद्यालय में शामिल होने के लिए भी अयोग्य बना दिया। इससे भी अंसार हरवानी को ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों में भाग लेने से नहीं रोका जा सका। उन्होंने पर्चे लिखना और प्रकाशित करना जारी रखा जिसमें उन्होंने सरकार के कृत्यों की आलोचना की और लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इससे क्रोधित होकर *सरकार ने उन्हें 1940 में गिरफ्तार कर लिया और 1941 में रिहा कर दिया।* फिर भी अंसार हरवानी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लेकर अपनी गतिविधियाँ तेज कर दीं। *परिणामस्वरूप उन्हें 1942 से 1946 तक विभिन्न जेलों में फिर से कैद किया गया।* बाद में उन्हें छोड दिया गया। ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, ऑल इंडिया यूथ लीग और इंडियन नेशनल कांग्रेस में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई जिम्मेदारियाँ संभाली। 4 फरवरी 1949 को अंसार हरवानी ने गौहर आरा बेगम से शादी की। आज़ादी के बाद वह फ़तेहपुर (1957-62) और बिसौली (1962-67) से लोकसभा के लिए चुने गए। बाद में अंसार हरवानी ने पत्रकारिता को अपनी मुख्य गतिविधि के रूप में चुना और अमृत बाजार पत्रिका जैसे प्रसिद्ध समाचार पत्र के विशेष स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम किया। उन्होंने इतिहास और राजनीति पर कई किताबें भी लिखीं। जीवन के अंतिम समय तक लोगों की सेवा में जीवन बिताने वाले अंसार हरवानी का 28 अक्टूबर 1996 को नई दिल्ली में निधन हो गया।
देश सदैव आपका ऋणी रहेगा।
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संदर्भ -THE IMMORTALS 2
- SYED NASEER AHAMED
( 94402 41727)
संकलन तथा अनुवादक लेखक -
अताउल्लाखा रफिक खा पठाण सर
सेवानिवृत्त शिक्षक
टूनकी तालुका संग्रामपूर जिल्हा बुलढाणा, महाराष्ट्र
9423338726

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