रमज़ान हमें कौनसी सीख दे रहा है, अल्लाह हमें किस चीज़ से आगाह कर रहा है*संकलन - बशीर शेख "कलमवाला"

 *रमज़ान हमें कौनसी सीख दे रहा है, अल्लाह हमें किस चीज़ से आगाह कर रहा है*



 ﻟَﺘُﺒْﻠَﻮُﻥَّ ﻓِﻰٓ ﺃَﻣْﻮَٰﻟِﻜُﻢْ ﻭَﺃَﻧﻔُﺴِﻜُﻢْ ﻭَﻟَﺘَﺴْﻤَﻌُﻦَّ ﻣِﻦَ ٱﻟَّﺬِﻳﻦَ ﺃُﻭﺗُﻮا۟ ٱﻟْﻜِﺘَٰﺐَ ﻣِﻦ ﻗَﺒْﻠِﻜُﻢْ ﻭَﻣِﻦَ ٱﻟَّﺬِﻳﻦَ ﺃَﺷْﺮَﻛُﻮٓا۟ ﺃَﺫًﻯ ﻛَﺜِﻴﺮًا ۚ ﻭَﺇِﻥ ﺗَﺼْﺒِﺮُﻭا۟ ﻭَﺗَﺘَّﻘُﻮا۟ ﻓَﺈِﻥَّ ﺫَٰﻟِﻚَ ﻣِﻦْ ﻋَﺰْﻡِ ٱﻷُْﻣُﻮﺭِ


तुम्हारें माल और तुम्हारी जान में तुम्हारा इम्तेहान होकर रहेगा और तुम्हें उन लोगों से जिन्हें तुमसे पहले किताब प्रदान की गई थी और उन लोगों से जिन्होंने 'शिर्क' किया, बहुत-सी कष्टप्रद बातें सुननी पड़ेगी। परन्तु यदि तुम जमें रहे और (अल्लाह का) डर रखा, तो यह उन कर्मों में से है जो आवश्यक ठहरा दिया गया है (3:186)





इस्लाम में रमज़ान का महीना केवल रोज़ा रखने का ही समय नहीं, बल्कि इंसान के भीतर सब्र, तक़वा और आत्मिक शुद्धि पैदा करने का एक महान प्रशिक्षण है। 


मशहूर तफ़सीर तफहिमुल कुरआन में मौ. अबुल आला मौदूदी रहे. लिखते है, 

*यह आयत मुसलमानों को यह समझाती है कि दीन की राह आसान नहीं होती। सच्चाई और न्याय के रास्ते पर चलने वाले लोगों को कभी आर्थिक कठिनाइयों, कभी सामाजिक दबाव और कभी लोगों के तानों का सामना करना पड़ता है। इसलिए ईमानवाले के लिए सबसे ज़रूरी गुण सब्र और तक़वा हैं।*


रमज़ान का महीना दरअसल इन्हीं गुणों को विकसित करने का एक अभ्यास है। जब इंसान दिन भर भूख और प्यास को बर्दाश्त करता है, तो वह केवल खाने-पीने से ही नहीं रुकता बल्कि अपने ग़ुस्से, इच्छाओं और बुरे विचारों पर भी नियंत्रण करना सीखता है। यही तक़वा की असली शुरुआत है। रोज़ा इंसान को यह सिखाता है कि अगर वह अल्लाह की खातिर भूख और प्यास सह सकता है, तो जीवन की अन्य कठिनाइयों में भी धैर्य और संयम के साथ डटा रह सकता है।


*आज के समय में जब समाज में नफरत, तनाव और वैचारिक टकराव बढ़ते जा रहे हैं, तब रमज़ान का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह महीना हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने चरित्र, धैर्य और ईमान को बनाए रखना ही असली सफलता है।*


इस प्रकार रमज़ान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक नैतिक और आध्यात्मिक प्रशिक्षण है, जो इंसान को सब्र, तक़वा और उच्च चरित्र की राह पर चलना सिखाता है।

- संकलन - बशीर शेख "कलमवाला"

Post a Comment

0 Comments