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इंडिया मुस्लिम OBC ऑर्गनाइजेशन के नेता शब्बीर अंसारी का निधन; मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कराने में निभाई थी अहम भूमिका
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प्रसिद्ध ओबीसी कार्यकर्ता शब्बीर अहमद अंसारी का 79 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के जालना में निधन हो गया। वे ऑल इंडिया मुस्लिम ओबीसी ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।
सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए चार दशकों से अधिक समय तक संघर्ष करने वाले प्रसिद्ध ओबीसी कार्यकर्ता शब्बीर अहमद अंसारी का रविवार को महाराष्ट्र के जालना शहर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी।
जालना के पुराने इलाके नूतन वसाहत के निवासी शब्बीर अहमद अंसारी अपनी पत्नी, तीन बेटों और छह बेटियों के साथ रहते थे। उनका निधन पूरे ओबीसी और पसमांदा समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके जाने से सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
उनकी स्मृति में उनके द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी पर है। उनके अनुयायी और सहयोगी उन्हें मर्द-ए-मुजाहिद और ओबीसी संघर्ष योद्धा के रूप में याद करते रहेंगे।
सामाजिक न्याय के प्रति समर्पित जीवन
शब्बीर अहमद अंसारी को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आंदोलन में एक विशाल व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय, समानता और पिछड़े समुदायों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
ऑल इंडिया मुस्लिम ओबीसी आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया और आरक्षण तथा समान अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जनजागरण किया।
उनकी खासियत थी कि वे जटिल सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचा देते थे, जिसके कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त था।
मंडल आयोग की सिफारिशों के प्रबल समर्थक
अंसारी साहब ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की लड़ाई में वे अग्रणी रहे। उन्होंने पसमांदा मुस्लिम समाज के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई और इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने का काम किया।



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